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  • Writer's pictureले०ज० गुरमीत सिंह (से०नि०)

जाग्रत युवा शक्ति के बल पर ही विश्व गुरु भारत बनने का मार्ग प्रशस्त होगा


युवा शक्ति किसी भी देश की वह ताकत है जो उसके भविष्य को बदल सकती है इसलिए हमें जागृत युवा शक्ति की आवश्यकता है। हम जिस दौर से गुजर रहे हैं यह देश और युवाओं के लिए स्वर्णिम युग है। देश में इस समय लगभग 60 प्रतिशत आबादी युवा है, जो आने वाले समय में देश की दशा एवं दिशा के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे है। ऐसे महत्त्वपूर्ण एवं दुर्लभ क्षण में आवश्यकता है वर्तमान पीढ़ी को सशक्त एवं समर्थ बनाने की। राष्ट्र नायक स्वामी विवेकानन्द जी ने जो उद्घोष किया था एक बार फिर उसकी प्रतिध्वनि की आवश्यकता है-उठो जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक रूको नहीं।


युवा शक्ति ही वह शक्ति है जिसने हर समय में युग निर्माण किया। जिस के योग्य नेतृत्व में सभ्यता, संस्कृति आगे बड़ी। फिर चाहे वह प्रभु श्री राम की वानर सेना हो जिसमें अंगद, नल-नील, हनुमान जैसे जज़्बे और समर्पण से भरपूर नौजवान हों। चाहे देश को आज़ाद करवाने वाले शहीद भगत सिंह, कर्तार सिंह सराभा, उधम सिंह जैसे देश भक्त हों या फिर श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा निर्मित खालसा फौज हो। श्री कृष्ण जी के योग्य नेतृत्व में अधर्मियों का नाश करने वाली पांडव सेना हो या फिर विश्वामित्र जी की आज्ञा अनुसार देश के आततायी राक्षसों का नाश करने वाले युवा श्री राम और लक्ष्मण जी हों। हर समय युवा शक्ति ने ही विश्व में नवीन क्षितिज का निर्माण कर देश, कौम, संस्कृति, धर्म आदि की रक्षा की है।


उमंग, उल्‍लास और ऊर्जा से भरे युवाओं से मिलना और उनके साथ संवाद करना मुझे हमेशा से प्रिय रहा है। क्योंकि हमारे युवा बेटे-बेटियां, न केवल देश को दिशा देने की सामर्थ्‍य रखते हैं, अपितु वे स्‍वयं भारत का भविष्‍य हैं। मेरा मानना है कि युवाओं को रोजगार के अवसर तलाशने के बजाय अपने जीवन का उद्देश्य तलाशना चाहिए यदि उद्देश्य के हिसाब से श्रम करें तो सफलता निश्चित है। जो युवा जहाँ है जिस स्थिति में है वहीं से स्वावलम्बी बन सकता है और आगे बढ़ सकता है। देश में उद्यमिता विकास, कौशल विकास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में बड़ा काम हो रहा है और इसमें जाग्रत युवाओं की भूमिका महत्त्वपूर्ण होगी।


जाग्रत नौजवानों का फर्ज है कि वह आलस्य को त्याग कर दूसरों के कल्याण के लिए कदम बढ़ाएं। जाग्रत युवा शक्ति के बल पर ही हम भारतीय इतिहास, संस्कृति, अर्थव्यवस्था, राजनीति, संस्कार और दैनिक जीवन में उत्कर्ष कर सकते हैं। भारत का हर युवा कुशल वक्ता बने और कुशल लेखक बनें, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मार्डन टेक्नोलॉजी, रिसर्च, इनोवेशन, स्टार्टअप्स और अलग-अलग अर्थों में उपस्थित अवसरों को पहचाने और चुनौतियों का समाधान खोजने में अपनी भूमिका निभाएं। इसी के साथ भारत की युवा शक्ति को पर्यावरण की सुरक्षा और इसके संवर्धन के लिए भी आगे आना होगा।


यह हमारा दृढ़ विश्वास है कि आजादी का अमृत महोत्सव पूरे भारत की युवाशक्ति को बड़े परिवर्तन के लिए उत्प्रेरित करेगा, ताकि शक्तिशाली, आत्मनिर्भर, विश्व गुरु भारत बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके।

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